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| जानवर |
12 जानवर जो दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तान में पाए जाते हैं
सहारा रेगिस्तान एक विशाल और शुष्क रेगिस्तान है जो पूरे उत्तरी अफ्रीका में लगभग 3.6 मिलियन वर्ग मील में फैला हुआ है। यह दुनिया का सबसे बड़ा गर्म रेगिस्तान है।
सहारा रेगिस्तान में दिन के समय यहां का तापमान 120 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक हो सकता है और रात में तापमान लगभग शून्य तक गिर सकता है।
लेकिन इतना गर्म होने के बावजूद सहारा रेगिस्तान विभिन्न प्रकार के जीवों का घर है जिनमें धरती के कुछ सबसे खतरनाक जानवर भी पाए जाते हैं।
सहारा रेगिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान है जहां पर भीषण गर्मी के साथ तेज और गर्म हवाएं इस बंजर रेगिस्तान को और भी खतरनाक बना देती हैं।
आपको बता देते हैं कि सहारा रेगिस्तान में साल भर में केवल 2 से 10 इंच बारिश होती है जो बहुत कम है। यहां पानी और पेड़ कम ही देखने को मिलते हैं। ऐसे में यहां जीवन का पनपना बेहद मुश्किल लगता है लेकिन जो हमें मुश्किल लगता है वो प्रकृति के लिए बेहद आसान है।
इसलिए हम सहारा रेगिस्तान में पाए जाने वाले जानवरों के बारे में बात करेंगे जो इस विशाल रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने में सक्षम है तो चलिए शुरू करते हैं यह लेख, 12 जानवर जो दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तान में पाए जाते हैं | 12 animals Living In The Desert In Hindi
1. लकड़बग्घा
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| लकड़बग्घा |
Hyena Animal
लकड़बग्घा एक खतरनाक जानवर है जो सहारा रेगिस्तान में घूमता है। यह मांसाहारी जानवर अपने तेज़ दांतों, शक्तिशाली जबड़ों और मैला ढोने के व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। लेकिन लकड़बग्घे ज्यादातर मनुष्यों के लिए आक्रामक नहीं होते हैं।
लेकिन अगर उन्हें खतरा महसूस हो या इनको भोजन नहीं मिल रहा हो तो वे खतरनाक हो सकते हैं। उनकी उपस्थिति के बारे में जागरूक रहना और लकड़बग्घा को आपके कैंपसाइट पर आकर्षित होने से बचाने के लिए सावधानी बरतना चाहिए।
यदि सहारा रेगिस्तान में आपका सामना किसी लकड़बग्घे से होता है तो शांत रहना और भागने से बचना महत्वपूर्ण है। लकड़बग्घे तेज़ गति से दौड़ने में सक्षम होते हैं और आसानी से इंसान से आगे निकल सकते हैं। अपने आप को बड़ा और डराने वाला दिखाते हुए धीरे-धीरे पीछे हटना चाहिए।
लकड़बग्घा के मांद या सुरंग के बारे में जागरूक होना भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके पास जाना खतरनाक हो सकता है। लकड़बग्घे अपने बच्चों की बेहद सुरक्षा करते हैं और अगर उन्हें लगता है कि उनकी मांद को खतरा हो रहा है तो लकड़बग्घा हमला कर सकते हैं।
2. जहरीले साँप
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| जहरीले साँप |
Poisonous Snakes Animal
साँप सबसे खतरनाक जानवरों में से कुछ हैं जिनका सामना आप सहारा रेगिस्तान में कर सकते हैं। इस क्षेत्र में कई जहरीले सांप पाए जाते हैं जिनमें ब्लैक डेजर्ट कोबरा, हॉर्नड वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर होते हैं।
इन सांपों को पहचानना मुश्किल हो सकता है क्योंकि यह सांप अच्छी तरह से छिपे होते हैं और रेगिस्तानी इलाकों में घुल-मिल जाते हैं। जहरीले सांपों की पहचान करने में सक्षम होना जरूरी है ताकि आप उनसे बचने के लिए सावधान रह सके।
जहरीले सांपों की पुतलियाँ भट्ठी जैसी होती हैं जबकि गैर जहरीले सांपों की पुतलियाँ गोल होती हैं। उनके पास एक अलग त्रिकोणीय सिर और नुकीले दांत भी होते हैं जो उपयोग न होने पर वापस उनके मुंह में मुड़ जाते हैं।
सहारा रेगिस्तान में जहरीले सांपों से बचने के लिए सावधान रहें और ऊंची घास या घनी वनस्पति वाले क्षेत्रों से गुजरने से बचें। दरारों या छिद्रों में पहुँचते समय सावधान रहें क्योंकि यह जहरीले साँप इन क्षेत्रों में छिपे हो सकते हैं।
3. गोल्डन मोल
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| गोल्डन मोल |
Golden Mole Animal
गोल्डन मोल रेगिस्तानी इलाकों में पाए जाने वाले यह जीव सुनहरे रंग के होते हैं जो रेत पर चलने के साथ-साथ रेत के अंदर छुपकर भी अपनी गति बनाए रख सकते हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि यह रेत में तैर रहे हैं और इस गोल्डन मोल की खोज 1825 के आसपास हुई थी।
गोल्डन मोल के शरीर पर कुछ सुनहरे रंग के बाल होते हैं और ये बाल इतने बड़े होते हैं कि इनकी आंखें ढक जाती हैं लेकिन इन प्राणियों की सुनने की क्षमता बहुत तेज़ होती है।
इसी कारण यह रेत में होने वाली किसी भी हलचल को बहुत जल्दी पहचान लेते हैं। जिसके बाद यह शिकार के करीब पहुंचकर उन पर हमला कर देते हैं.
वैसे यह जीव इसलिए भी खतरनाक होते हैं क्योंकि यह रात के साथ-साथ दिन में भी सक्रिय रहकर शिकार करते हैं। गोल्डन मोल 7.9 से 9.4 इंच तक बड़ा हो सकता है। वहीं इनका वजन लगभग 538 ग्राम तक हो सकता है। पढ़िए- हाथी की तरह दिखने वाला हाथी कर्कश चूहा के बारे में रोचक तथ्य
4. रेगिस्तानी कछुआ
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| रेगिस्तानी कछुआ |
Desert Tortoise Animal
दुनिया भर में पाए जाने वाले ज्यादातर कछुए पानी के आसपास पाए जाते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह कछुआ रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाता है जो बिना पानी पिए एक साल या उससे भी ज्यादा समय तक जीवित रह सकता है।
यह कछुए पानी की तलाश में खुदाई करते हैं और उनकी यही तकनीक उन्हें गर्मी से बचने के लिए भी काम आती है। सहारा रेगिस्तान में पाए जाने वाले इन रेगिस्तानी कछुओं की उम्र 50 से 150 साल तक हो सकती है।
यह रेगिस्तानी कछुआ लगभग 4 से 6 इंच तक बड़े हो सकते हैं जबकि इनका वजन लगभग 0.2 से 5 किलोग्राम के आसपास हो सकता है। यह कछुए घास के साथ-साथ पत्तियां भी खाते हैं और यह भूरे रंग के होते हैं।
5. डोरकास गज़ेल
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| डोरकास गज़ेल |
Dorcas Gazelle Animal
रेगिस्तान में रहने वाले यह हिरण दुनिया में पाई जाने वाली सबसे छोटी हिरण प्रजाति मानी जाती हैं। डोरकास गज़ेल की लंबाई 90 से 110 सेंटीमीटर तक हो सकती है और उनका वजन लगभग 15 से 20 किलो तक होता है।
इनको पेड़ों के पत्तों के साथ-साथ फूल भी खाना पसंद करते है और रेगिस्तान में पाए जाने वाले यह जानवर यहां पानी की कमी के कारण गीले फूल-पत्तियां ही खाते हैं जिससे इनकी पानी की आपूर्ति भी पूरी हो जाती है।
वैसे तो यह हिरण पूरी जिंदगी बिना पानी पिए जी सकते हैं और इनकी उम्र करीब 15 साल है। डोरकास गज़ेल झुंड में रहते हैं और एक झुंड में लगभग 100 हिरण हो सकते हैं।
किसी शिकारी के हमला करने पर यह सभी जीव तितर-बितर हो जाते हैं लेकिन जैसे ही ख़तरा कम होता है तो यह एक बार फिर झुंड में आ जाते है।
6. ऊँट
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| ऊँट |
Camel Animal
सहारा रेगिस्तान में पाए जाने वाले ऊँट 10 से 11.5 फीट तक लंबे होते हैं और ऊँट का वजन लगभग 400 से 600 किलोग्राम तक होता है। यह बड़े ऊँट अनाज खाना पसंद करते हैं जिसके बाद यह ऊंट सूखे और बंजर रेगिस्तान में भी एक दिन में 32 किलोमीटर से अधिक चल सकते हैं।
इसी कारण से ऊँट को रेगिस्तानी जहाज के नाम से भी जाना जाता है और इतना चलने के बाद भी यह जानवर बिना खाए कई हफ्तों तक जीवित रह सकते हैं। लेकिन इन सभी गुणों के बाद भी कुछ लोग मांस के लिए इन जानवरों का शिकार करते हैं।
लेकिन आपको बता देते हैं कि ऊंट एक अरबी शब्द है जिसका मतलब खूबसूरत होता है। अगर इन खूबसूरत ऊंटों का शिकार न किया जाए तो यह रेगिस्तानी जानवर लगभग 17 साल या उससे भी ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं।
7. डेजर्ट मॉनिटर
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| डेजर्ट मॉनिटर |
Desert Monitor Animal
दुनिया भर में मॉनिटर की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमें से एक है डेजर्ट मॉनिटर जिसकी लंबाई लगभग 1 मीटर है। उनके शरीर की त्वचा उन्हें रेगिस्तान के गर्म क्षेत्रों ढलने में मदद करती है।
लेकिन उनकी त्वचा के अलावा उनके शरीर में भी कुछ ऐसी ग्रंथियाँ पाई जाती हैं जिसके कारण उन्हें पानी की कमी नहीं होती है। 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले डेजर्ट मॉनिटर भोजन की खोज में कई किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर सकते हैं।
लेकिन यह जानवर दिन में सक्रिय रहकर भोजन की खोज करते हैं जिसमें उनकी जीभ भी इनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। सांपों की तरह डेजर्ट मॉनिटर भी अपनी जीभ हवा में लहराता है जिसके बाद यह शिकार की गंध का अंदाजा लगाकर उसका पीछा करते हैं।
लेकिन कई मामलों में यह भी पाया गया है कि भले ही इन जानवरों की शिकार की तलाश पूरी न हो लेकिन यह लंबे समय तक बिना खाए भी रह सकते हैं। पढ़िए- चिंपैंजी के बारे में खास जानकारी जो आपको हैरान कर देगी
8. एडैक्स मृग
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| एडैक्स मृग |
Addax Antelope Animal
सहारा रेगिस्तान के जानवरों में यह हिरण विलुप्त होने की कगार पर है। इन एडैक्स मृगों की संख्या 500 से भी कम है। इन्हें घास और पत्तियाँ खाना पसंद है। इनकी खासियत इनके बड़े सींग हैं जो पीछे की ओर मुड़े होते हैं।
एडैक्स मृग के सींगों की लंबाई 72 सेमी तक हो सकती है लेकिन इन हिरणों के पैर अन्य हिरण प्रजातियों की तुलना में बहुत छोटे होते हैं। वहीं इनके पैरों का निचला हिस्सा यानी खुर बहुत बड़े होते हैं जिनकी मदद से यह रेगिस्तान में बहुत आसानी से चल सकते हैं।
वैसे तो यह हिरण ज्यादातर सुबह और शाम को सक्रिय रहते हैं और भोजन की तलाश में रहते हैं। क्योंकि इस समय मौसम बहुत ठंडा होता हैं। गर्मी के दिनों में इनके शरीर का रंग रेत जैसा होता है जिसमें कुछ सफेद रंग भी होता है। जबकि सर्दियों में इसका रंग बदलकर गहरा भूरा हो जाता है।
9. फेनेक फॉक्स
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| फेनेक फॉक्स |
Fennec Fox Animal
सहारा रेगिस्तान में पाई जाने वाली यह लोमड़ी दुनिया की सबसे छोटी लोमड़ी मानी जाती है जिसे बड़े कानों के कारण दूर से ही पहचाना जा सकता है। सहारा लोमड़ी का रंग कुछ लाल और हल्के रंग का होता है साथ ही इसकी पूंछ पर काले धब्बे होते हैं।
यह लोमड़ी छोटे मोटे कीड़ों के अलावा छिपकलियों और पक्षियों के अंडे भी खाती है। इतना ही नहीं सहारा रेगिस्तान लोमड़ी जीवन जीने के लिए फलों के साथ-साथ पौधों की पत्तियां भी खा सकती है।
इस फेनेक लोमड़ी की लंबाई लगभग 2 से 3 फीट तक होती है और इसका वजन लगभग 2.7 किलोग्राम से 13.7 किलोग्राम तक होता है। यह लोमड़ी 32 किलोमीटर की तेज रफ्तार से भी दौड़ सकती है।
लेकिन इतनी तेज दौड़ने के बाद भी यह लोमड़ी कई जानवरों का शिकार बन जाती है जिसमें लकड़बग्घा, सियार और चील से लेकर अन्य जानवर होते हैं।
10. साइडवाइंडर सांप
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| साइडवाइंडर सांप |
Sidewinder Snake Animal
सहारा रेगिस्तान में रहने वाला साइडवाइंडर सांप रेगिस्तान के अलावा दुनिया का सबसे जहरीला सांप भी है जो किसी भी इंसान को मारने की क्षमता रखता है। इसके अलावा इस सांप को हॉर्न वाइपर के नाम से भी जाना जाता है।
साइडवाइंडर सांप जहरीला होने के साथ-साथ लगभग 29 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी दौड़ सकता है। जहां दूसरे सांप दौड़ते हैं वहीं पर यह सांप तिरछा दौड़ता है।
साइडवाइंडर सांप रेत के नीचे छिपकर हमला करते है यह अपने शिकार पर नज़र रखने के लिए अपने पूरे शरीर को रेत के नीचे छिपा लेता है और केवल अपनी आँखें बाहर रखता है।
जैसे ही कोई शिकार इस सांप के पास जाता है यह सांप तुरंत ही जहरीला डंक देकर मार देता है। वैसे इस सांप को छिपकलियों और चूहों के साथ-साथ अन्य छोटे जीव भी पसंद है।
11. शुतुरमुर्ग
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| शुतुरमुर्ग |
Ostriches Bird
सहारा रेगिस्तान में पाए जाने वाले पक्षियों की बात की जानी चाहिए और उसमें शुतुरमुर्ग का नाम नहीं लिया जाना चाहिए ऐसा हो नहीं सकता, शुतुरमुर्ग को दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी माना जाता है।
इस पक्षी की लंबाई लगभग 2.5 मीटर से अधिक होने के साथ ही इनका वजन 70 से 145 किलोग्राम तक हो सकता है। वैसे शुतुरमुर्ग के भारी शरीर के साथ-साथ उनके अंडे भी काफी भारी होते हैं जिनका वजन लगभग 2 किलो होता है।
रेगिस्तान में पानी की कमी है इसी कारण यह पक्षी सुबह और शाम के समय पत्तियां खाना पसंद करते हैं क्योंकि इस समय पत्तियों पर नमी होती है। लेकिन यह पक्षी बिना पानी पिए भी लम्बे समय तक जीवित रह सकते हैं।
ऐसा नहीं है कि भोजन और कम पानी के कारण उनके शरीर की ताकत में कोई कमी आती है। शुतुरमुर्ग अपनी तेज़ लात से किसी को भी घायल कर सकते हैं। वहीं इन मजबूत पैरों के कारण यह 70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से भी दौड़ सकते हैं।
यह पक्षी उड़ नहीं सकते लेकिन इनकी तेज़ रफ़्तार इस कमी को पूरा कर देती है। अपने लंबे पैरों के साथ-साथ इन पक्षियों की गर्दन भी बहुत लचीली होती है जिसे यह अपनी इच्छानुसार घुमा सकते हैं।
12. डेथस्टॉकर बिच्छू
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| डेथस्टॉकर बिच्छू |
Deathstalker Scorpion Animal
सहारा रेगिस्तान में रहने वाले जानवरों में डेथस्टॉकर बिच्छू दुनिया के सबसे जहरीले बिच्छुओं में से एक है जिसमें खतरनाक न्यूरोटॉक्सिन जहर होता है।
अगर यह बिच्छू आपको एक बार डंक मार दे तो सिरदर्द हो सकता है इसके अलावा उल्टी तक की समस्या होती है और समय पर इलाज ना किया जाए तो मौत भी हो सकती है।
सहारा रेगिस्तान में पाए जाने वाले इन बिच्छुओं का रंग कुछ-कुछ पीला या हल्का हरा होता है। छोटे मोटे कीड़ों के साथ-साथ पतंगे और झींगा भी इन्हें खाना पसंद करते हैं।
डेथस्टॉकर बिच्छू लंबाई की बात करें तो यह बिच्छू लगभग 5.8 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं जबकि इनकी उम्र लगभग 4 से 25 साल तक होती है।
तो ये थे सहारा रेगिस्तान में पाए जाने वाले 12 जानवर जो इस रेगिस्तान में कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन बिताते हैं। आप सहारा रेगिस्तान के इन जानवरों के बारे में क्या सोचते हैं हमें कमेंट करके बताइए।












